सपनों का सफर - एक मेहनती लड़के की कहानी
कहानी का शीर्षक: "सपनों का सफर – एक मेहनती लड़के की कहानी"
राहुल एक छोटे से गाँव में अपने माता-पिता के साथ रहता था। उसके पिता एक किसान थे और माँ घर पर सिलाई का काम करती थीं। घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। कभी-कभी तो दो वक्त का खाना भी ठीक से नसीब नहीं होता था। लेकिन राहुल के भीतर कुछ खास था—सपनों को साकार करने की जिद और मेहनत करने का जुनून।
राहुल को बचपन से पढ़ाई में रुचि थी। जब बाकी बच्चे खेलते, वह किताबों में खोया रहता। स्कूल जाने के लिए उसे रोज़ तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की। उसके पास किताबें कम थीं, लेकिन जुनून बेहिसाब था।
शाम को वह खेतों में अपने पिता की मदद करता और रात में लालटेन की मद्धम रोशनी में पढ़ाई करता। गाँव में बिजली अक्सर नहीं रहती थी, लेकिन राहुल की लगन को अंधेरा नहीं रोक सका। गाँव के कुछ लोग कहते, "इतनी मेहनत क्यों करता है? आखिरकार किसान ही बनेगा!" मगर राहुल की आँखों में एक सपना था—IIT में पढ़ाई करके बड़ा इंजीनियर बनना।
राहुल ने खुद ही मोबाइल रिपेयरिंग का काम सीखा। उसने गाँव में एक छोटी-सी दुकान खोली। दिन में मोबाइल बनाता और रात में पढ़ाई करता। जो भी कमाता, उससे किताबें और कोचिंग के लिए ऑनलाइन क्लासेज़ का खर्चा निकालता। उसने YouTube पर फ्री वीडियो से पढ़ना शुरू किया और अपना टाइमटेबल बना लिया।
12वीं की बोर्ड परीक्षा में वह ज़िले में टॉप पर आया। फिर उसने दिन-रात मेहनत कर JEE की तैयारी की और स्कॉलरशिप परीक्षा पास कर ली। आखिरकार, उसे देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज, IIT में दाखिला मिल गया।
जब वह गाँव लौटा, तो वही लोग जो कभी मज़ाक उड़ाते थे, अब गर्व से उसके बारे में बात करते हैं। राहुल अब एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है और अपने गाँव के बच्चों को पढ़ाई में मदद करता है।
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सीख: अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। राहुल की कहानी हमें सिखाती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर लगन हो तो सपने जरूर पूरे होते हैं।

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