"12वीं फेल लेकिन ज़िंदगी में पास"
रवि एक गरीब परिवार से था। उसके पिताजी मजदूरी करते थे और मां दूसरों के घरों में काम। परिवार ने उम्मीद लगाई थी कि रवि पढ़-लिखकर घर की हालत बदलेगा। लेकिन जब 12वीं का रिज़ल्ट आया, रवि फेल हो गया। घर में सन्नाटा छा गया।
रिश्तेदारों ने ताने मारे, दोस्तों ने दूरी बना ली। रवि खुद को बेकार और नाकाम समझने लगा। लेकिन उसकी मां ने सिर्फ एक बात कही –
"अगर अब भी हार गया, तो तुझे सच में कोई नहीं हरा सकता।"
यह बात रवि के दिल में उतर गई। उसने ठान लिया कि अब वो सिर्फ पास नहीं होगा, बल्कि मिसाल बनेगा।
दिन में वो एक होटल में बर्तन धोता और रात में पढ़ाई करता। उसने दोबारा 12वीं दी — और पास हो गया। फिर ग्रेजुएशन किया और साथ ही सरकारी परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी।
सालों की मेहनत के बाद, एक दिन वो सफल हुआ – उसका सेलेक्शन सरकारी अफसर के रूप में हो गया।
अब वही लोग जो उसे 12वीं फेल कहकर ताना मारते थे, आज उसे "साहब" कहकर सलाम करते हैं।
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सीख:
एक परीक्षा में फेल होना आपकी काबिलियत का फैसला नहीं करता। हार मान लेना ही असली हार है।

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